राख मलबा और उम्मीद: अर्की अग्निकांड में सर्च ऑपरेशन जारी DNA जांच से होगी शिनाख्त
राख मलबा और उम्मीद: अर्की अग्निकांड में सर्च ऑपरेशन जारी DNA जांच से होगी शिनाख्त
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की बाजार में हुए भीषण अग्निकांड के बाद हालात बेहद दर्दनाक बने हुए हैं। चारों ओर राख और मलबा फैला है, लेकिन इनके बीच अब भी अपनों को तलाशती आंखों में उम्मीद बाकी है। प्रशासन की ओर से लगातार सर्च ऑपरेशन जारी है, हालांकि अब तक मलबे से एक बच्चे का शव और कई क्षत-विक्षत बॉडी पार्ट्स ही बरामद हो पाए हैं।
मलबे से मिले अवशेषों की हालत इतनी खराब है कि यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि ये कितने लोगों के हैं। सभी अवशेषों को DNA जांच के लिए एफएसएल लैब भेजा जा रहा है, ताकि मृतकों की पहचान सुनिश्चित की जा सके। सरकार ने इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की है।
प्रशासन के अनुसार, लापता 9 लोगों में से एक बच्चे का शव और 7 बॉडी पार्ट्स अब तक बरामद किए जा चुके हैं। एसडीएम अर्की ने बताया कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा। राहत और बचाव कार्यों में SDRF के 10, NDRF के 33 जवानों के अलावा डॉग स्क्वायड, होमगार्ड के 34 और पुलिस के 35 जवान तैनात हैं।
यह भीषण अग्निकांड रविवार देर रात ढाई से तीन बजे के बीच हुआ था। आग एक रिहायशी मकान से भड़की, जिसके ग्राउंड और पहली मंजिल पर दुकानें थीं, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल पर नेपाल और बिहार के मजदूर रहते थे। हादसे के दौरान सात परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन दो नेपाली परिवार भीतर ही फंस गए।
अब तक 8 और 10 साल के दो बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बिहार का एक बच्चा सोमवार सुबह जीवित रेस्क्यू किया गया था, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, दूसरे बच्चे का शव मंगलवार को मलबे से बरामद किया गया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, वहां अवैध रूप से एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे। मलबे से आठ घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर बरामद हुए हैं, जिनमें से कुछ फटे हुए पाए गए। एसपी सोलन गौरव सिंह ने बताया कि भवन मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि भवन मालिक अपनी दुकान में अवैध रूप से सिलेंडर रखता और बेचता था। फॉरेंसिक टीम ने मौके से अहम सबूत जुटाए हैं और डीजल व केरोसिन के एंगल से भी जांच की जा रही है।
इस बीच, नेपाल निवासी गोविंद और राज बहादुर ने प्रशासन से सर्च ऑपरेशन तेज करने और यदि उनके परिजनों की मौत हो चुकी है तो शव नेपाल भेजने की व्यवस्था करने की मांग की है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए गौशाला भवन में ठहरने और भोजन की व्यवस्था की है।
इस हादसे में लापता काशीराम और उसके परिवार की कहानी हर किसी को भीतर तक झकझोर रही है। काशीराम दो महीने पहले ही काजा से मजदूरी कर लौटा था। उसका एक बेटा चाचा के घर होने के कारण बच गया, जबकि दूसरा नेपाल में है। दिनभर उसका बेटा सुशील बचाव दल के पास खड़ा मलबे को निहारता रहा, आंखों में अपनों के मिलने की उम्मीद और नम आंखों के साथ। काशीराम के भाई मोहन बहादुर के मुताबिक, उनके भाई, भाभी, दो बच्चे और भांजे का पूरा परिवार अब भी लापता है। उधर, नेपाल में भी घर-घर मातम पसरा हुआ है।