कुल्लू घाटी में चार दिन में तीसरी हत्या दोस्त ने दोस्त को मौत के घाट उतारा
कुल्लू घाटी में चार दिन में तीसरी हत्या, दोस्त ने दोस्त को मौत के घाट उतारा
कुल्लू।
देवताओं की भूमि और शांत वादियों के लिए पहचानी जाने वाली हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में अपराध की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। बीते चार दिनों के भीतर जिले में एक के बाद एक सामने आई हत्याओं ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। ताज़ा मामला ऐसा है जिसने दोस्ती जैसे पवित्र रिश्ते को भी शर्मसार कर दिया।
शराब के नशे में दोस्ती का खूनी अंत
यह घटना कुल्लू जिले के पतलीकूहल क्षेत्र के 16 मील इलाके की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार नेपाली मूल के दो प्रवासी मजदूर आपस में दोस्त थे और साथ बैठकर शराब पी रहे थे। हंसी-मजाक के बीच शुरू हुई बातचीत कुछ ही देर में कहासुनी और फिर हिंसा में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नशे में धुत ललित उर्फ ललन ने अचानक अपना आपा खो दिया और अपने दोस्त बीर बहादुर सिंह (36) को सड़क किनारे से उफनती ब्यास नदी की ओर धक्का दे दिया। संतुलन बिगड़ने से बीर बहादुर गहरी खाई में गिरते हुए सीधे नदी में जा गिरा। पत्थरों से टकराने और तेज बहाव के कारण उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
आरोपी हिरासत में, हत्या का मामला दर्ज
घटना की सूचना मिलते ही पतलीकूहल पुलिस मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए हैं।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि यह विवाद केवल शराब के नशे का परिणाम था या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश भी थी। आरोपी से गहन पूछताछ जारी है।
नशे ने छीनी जिंदगी और तोड़ी दोस्ती
यह वारदात एक बार फिर दर्शाती है कि शराब किस तरह इंसान की सोच, रिश्तों और ज़िंदगियों को तबाह कर देती है। जिन सपनों और संघर्षों को दोनों दोस्त साथ साझा कर रहे थे, वही दोस्ती मौत का कारण बन गई।
मृतक और आरोपी दोनों ही नेपाल के जाजरकोट (कर्णाली प्रदेश) के निवासी बताए जा रहे हैं, जो रोज़गार की तलाश में कुल्लू घाटी आए थे।
चार दिन में तीसरी हत्या, लोगों में डर
कुल्लू घाटी में लगातार हो रही हिंसक घटनाओं से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। बीते चार दिनों में यह जिले की तीसरी हत्या है। इससे पहले भी अलग-अलग इलाकों में खूनखराबे की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नशे का बढ़ता चलन अब देवभूमि की पहचान को नुकसान पहुंचा रहा है। लोगों ने प्रशासन से नशे पर सख्त नियंत्रण, पुलिस गश्त बढ़ाने और कानून-व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है, ताकि शांत पहाड़ों में फिर से सुकून लौट सके।