हिमाचल : सेना में लेफ्टिनेंट बना गांव का बेटा
शिमला (हिमाचल प्रदेश):
शिमला जिले के जुन्गा क्षेत्र से सटे पीरन गांव के लिए यह दिन ऐतिहासिक बन गया, जब गांव का बेटा रजत वर्मा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पहली बार अपने घर लौटा। जैसे ही रजत गांव पहुंचे, पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया।
गांव में हुआ भव्य स्वागत
राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद रविवार को रजत वर्मा के गांव पहुंचते ही ढोल-नगाड़ों की गूंज और भारत माता की जय के नारों से वातावरण गूंज उठा। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से रजत का भव्य स्वागत किया, वहीं परंपरागत नाटी नृत्य के साथ खुशी का इज़हार किया गया। पूरा पीरन गांव एक परिवार की तरह इस गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना।
माता-पिता हुए भावुक
इस अवसर पर रजत के माता-पिता भावुक नजर आए। पिता खजान सिंह वर्मा और माता शकुंतला वर्मा की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। गांववासियों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल रजत की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
पहले प्रयास में हासिल की सफलता
रजत वर्मा की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के, पहले ही प्रयास में CDS जैसी कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की। कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और अनुशासन के बल पर उन्होंने ऑल इंडिया 43वीं रैंक हासिल की और क्षेत्र से पहले सेना अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया।
शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि
रजत के पिता शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की शिक्षा और संस्कारों में कोई कमी नहीं आने दी। रजत ने 12वीं तक की पढ़ाई सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला से की और बाद में डिग्री कॉलेज सोलन से बीए (अर्थशास्त्र) की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ ही उन्होंने स्वयं अध्ययन के जरिए CDS परीक्षा की तैयारी की।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
रजत वर्मा की इस सफलता से गांव और क्षेत्र के युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। युवाओं का कहना है कि रजत ने उन्हें बड़े सपने देखने और देश सेवा के लिए प्रेरित किया है। वहीं रजत ने अपने स्वागत के दौरान कहा कि यह सफलता माता-पिता, शिक्षकों और गांववासियों के आशीर्वाद का परिणाम है।
देश सेवा के लिए तैयार
अब लेफ्टिनेंट रजत वर्मा भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देंगे। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत से पहाड़ों से निकलकर भी देश की शान बना जा सकता है।