इंस्टाग्राम से शुरू हुई प्रेम कहानी मंडप तक पहुंची लेकिन कानून ने रोक दी शादी
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर पनपते रिश्तों और बाल विवाह कानून को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां इंस्टाग्राम पर शुरू हुई एक प्रेम कहानी शादी के मंडप तक तो पहुंची, लेकिन कानून की दहलीज पर आकर रुक गई।
जानकारी के मुताबिक, ऊना के एक गांव की 17 वर्षीय किशोरी की दोस्ती इंस्टाग्राम के जरिए दूसरे राज्य में रहने वाले 22 वर्षीय युवक से हुई। बातचीत का सिलसिला बढ़ा, दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह दोस्ती प्यार में बदल गई। साथ जीवन बिताने के इरादे से दोनों ने अपने-अपने परिवारों को इस रिश्ते के बारे में बताया।
परिजनों की सहमति से शादी तय कर दी गई। विवाह के कार्ड छप गए, रिश्तेदारों को निमंत्रण भेजा गया और घर में शादी की रस्में भी शुरू हो गईं। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन इसी बीच किसी ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दे दी कि गांव में नाबालिग लड़की की शादी करवाई जा रही है।
सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम और पुलिस मौके पर पहुंची। उस समय घर में शादी की रस्में जारी थीं, लेकिन अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए विवाह की प्रक्रिया रुकवा दी।
टीम ने परिवार को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी और स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की की शादी कराना कानूनन अपराध है। पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लड़की और उसके माता-पिता की काउंसलिंग की गई। इस दौरान नाबालिग के भविष्य, शिक्षा और सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई।
चाइल्ड हेल्पलाइन ऊना की प्रभारी रीना कुमारी ने बताया कि शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई की गई। परिवार को कानून की जानकारी देने के बाद परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार की और लिखित रूप से आश्वासन दिया कि बेटी की शादी 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
पूरे मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति को भी दे दी गई है, ताकि लड़की की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया पर बनने वाले रिश्तों में भावनाओं के साथ-साथ कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना बेहद जरूरी है। डिजिटल युग में जहां रिश्ते तेजी से बन रहे हैं, वहीं अभिभावकों और समाज की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है कि वे बच्चों के भविष्य, शिक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता दें।