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फोन की लत बनती जा रही है गंभीर बीमारी युवाओं में बढ़ रहा नोमोफोबिया

फोन की लत बनती जा रही है गंभीर बीमारी युवाओं में बढ़ रहा नोमोफोबिया

मोबाइल फोन आज ज़रूरत बन चुका है, लेकिन इसकी बढ़ती लत अब बच्चों और युवाओं के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। इसका सीधा असर न केवल पढ़ाई पर पड़ रहा है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।

हिमाचल प्रदेश के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह अध्ययन 406 MBBS छात्रों पर किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों में नोमोफोबिया यानी फोन न होने पर घबराहट की समस्या पाई गई।

अध्ययन के अनुसार,
70.7 प्रतिशत छात्रों में मध्यम स्तर का नोमोफोबिया,
जबकि 19 प्रतिशत छात्र गंभीर रूप से इस समस्या से ग्रस्त पाए गए।
जानकारी गूगल फॉर्म के माध्यम से एकत्र की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन में शामिल अधिकांश छात्र 20 से 22 वर्ष की आयु वर्ग के थे, जो कुल संख्या का 52.8 प्रतिशत हैं। छात्राओं की संख्या 52.2 प्रतिशत रही और लगभग 58 प्रतिशत छात्र शहरी क्षेत्रों से थे।
लगभग सभी छात्रों, यानी 99.3 प्रतिशत के पास स्मार्टफोन मौजूद था, जिनमें से 75 प्रतिशत एंड्रॉयड फोन का उपयोग कर रहे थे। औसतन छात्र पिछले छह वर्षों से स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपोर्ट में सामने आए अहम आंकड़े:
– 70.2 प्रतिशत छात्र रोज़ाना चार घंटे से अधिक समय स्क्रीन पर बिताते हैं
– 89.9 प्रतिशत छात्रों को 24 घंटे इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है
– स्मार्टफोन का सबसे अधिक उपयोग सोशल मीडिया (89.7%) और मनोरंजन (81.5%) के लिए किया जा रहा है
– पढ़ाई के लिए फोन का इस्तेमाल 73.4 प्रतिशत छात्रों द्वारा किया जाता है

फोन के अत्यधिक इस्तेमाल का असर छात्रों की नींद और स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
– 86 प्रतिशत छात्र सोने से पहले फोन इस्तेमाल करते हैं
– 81.5 प्रतिशत छात्र नींद से उठते ही सबसे पहले फोन देखते हैं
– 78.1 प्रतिशत छात्र शौचालय में भी फोन का इस्तेमाल करते हैं
– 71.2 प्रतिशत छात्र लेक्चर के दौरान फोन देखते पाए गए

इसके अलावा,
– 23.2 प्रतिशत छात्र रात में नींद से उठकर फोन चेक करते हैं
– 64.8 प्रतिशत छात्र देर से सोते हैं
– 55.4 प्रतिशत छात्रों की नींद बार-बार बाधित होती है
– 50.7 प्रतिशत छात्रों को सिरदर्द या आंखों में तनाव की शिकायत है
– 40.1 प्रतिशत छात्र दिन में अत्यधिक नींद महसूस करते हैं

क्या है नोमोफोबिया?
नोमोफोबिया एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को फोन या इंटरनेट न होने पर डर, घबराहट और बेचैनी महसूस होती है। इसमें बार-बार फोन चेक करने की आदत, चिंता, सिरदर्द और कभी-कभी सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। विशेषज्ञ इसे स्मार्टफोन की लत का एक गंभीर रूप मानते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते अगर इस आदत पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

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