हिमाचल बोर्ड 10वीं परीक्षा: मेहनत और हौसले ने बदली बेटियों की तकदीर
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों ने इस बार यह साबित कर दिया कि सफलता केवल बड़े संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो साधारण परिवारों के बच्चे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। इस वर्ष मेरिट सूची में कई ऐसे छात्र-छात्राओं ने जगह बनाई है, जिन्होंने सीमित साधनों के बावजूद अपनी प्रतिभा से पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया।
शिमला जिले के रोहड़ू की रहने वाली साक्षी कुमारी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश की मेरिट सूची में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रोहड़ू की छात्रा साक्षी ने 700 में से 695 अंक हासिल किए। साक्षी एक साधारण परिवार से संबंध रखती हैं। उनकी मां रंजू देवी सिलाई का काम करती हैं, जबकि पिता भूपेंद्र शर्मा राजमिस्त्री हैं। परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है, लेकिन रोजगार के चलते लंबे समय से रोहड़ू में रह रहा है।
बेटी की सफलता पर साक्षी की मां भावुक नजर आईं। उन्होंने बताया कि परिवार ने हमेशा बेटी को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, लेकिन कभी अंक लाने का दबाव नहीं डाला। सीमित आय के बावजूद परिवार ने साक्षी की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी।
साक्षी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि वह नियमित रूप से टाइम-टेबल बनाकर पढ़ाई करती थीं। उन्हें अच्छे अंकों की उम्मीद थी, लेकिन प्रदेश मेरिट सूची में स्थान मिलने की खुशी उनके लिए किसी सपने से कम नहीं है। साक्षी भविष्य में नॉन-मेडिकल विषय लेकर इंजीनियर बनना चाहती हैं।
वहीं, रोहड़ू की ही रमनप्रीत ने भी प्रदेशभर में आठवां स्थान हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रोहड़ू की छात्रा रमनप्रीत ने 700 में से 692 अंक प्राप्त किए। उनके पिता कुलदीप चंद व्यवसायी हैं और परिवार मूल रूप से ऊना जिले से संबंध रखता है।
रमनप्रीत ने अपनी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि वह आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहती हैं और परिवार व प्रदेश का नाम रोशन करना चाहती हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें भाषण प्रतियोगिताओं में भी विशेष रुचि है।
इस बार के बोर्ड परीक्षा परिणामों ने यह संदेश दिया है कि सफलता केवल बड़े स्कूलों और सुविधाओं तक सीमित नहीं होती। मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से हर छात्र अपने सपनों को साकार कर सकता है। साक्षी और रमनप्रीत जैसी बेटियों की सफलता आज हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।