हिमाचल

मरीज की छाती में था जिंदा कॉकरोच! X-ray देख उड़े सबके होश- हुआ कुछ ऐसा

हिमाचल प्रदेश में “कॉकरोच वाले X-ray” की एक वायरल पोस्ट ने पिछले दो दिनों में बड़ी हलचल मचा दी है। सोलन, शिमला और बद्दी—हर जगह अस्पतालों के नाम बदलकर इसी एक तस्वीर को शेयर किया जा रहा था, जिससे आम लोग ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित हो गया।

वायरल दावा—मरीज के सीने में जिंदा कॉकरोच!

शुक्रवार देर रात से सोशल मीडिया पर तीन X-ray फिल्मों वाली एक तस्वीर तेज़ी से फैल रही थी। दावा किया गया कि सोलर जिले के सरकारी अस्पताल में एक विदेशी पर्यटक के सीने में जिंदा कॉकरोच दिखाई दिया। कहानी को और नाटकीय बनाते हुए कहा गया कि सिंगापुर से आए यात्री को सीने में दर्द हुआ, डॉक्टरों ने X-ray किया और कॉकरोच फेफड़ों के पास दिख गया। फिर डॉक्टरों ने उसे तुरंत वापस लौटने की सलाह दी और सिंगापुर में पता चला कि कॉकरोच मरीज में नहीं, X-ray मशीन में था।

स्वास्थ्य विभाग ने किया दावा खारिज

कुछ ही घंटों में यह पोस्ट अलग-अलग अस्पतालों के नामों के साथ शेयर होने लगी।
मामला गंभीर होते देख स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तस्वीरें एडिटेड और AI-जनरेटेड हैं। हिमाचल के किसी भी अस्पताल में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

अस्पतालों की OPD पर असर

फर्जी पोस्ट का असर यह हुआ कि सोलन अस्पताल में शनिवार सुबह नियमित X-ray कराने वाले मरीजों की संख्या कम हो गई।
कई मरीज स्टाफ से पूछते नजर आए—
“क्या आपकी मशीन में सच में कॉकरोच निकला था?”

डॉक्टरों और तकनीशियनों को बार-बार लोगों को समझाना पड़ा कि यह कहानी पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है।

स्वास्थ्य मंत्री और अस्पताल प्रशासन की सफाई

मामला बढ़ने पर स्वास्थ्य मंत्री ने सोलन अस्पताल प्रबंधन से बात कर पूरे मामले की जानकारी ली।
अस्पताल ने स्पष्ट किया कि X-ray मशीन पूरी तरह सुरक्षित और सही काम कर रही है। किसी विदेशी पर्यटक का ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया। वायरल तस्वीरें AI से बनाई गई प्रतीत होती हैं।

क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राकेश पंवार ने भी सार्वजनिक रूप से कहा—
“यह X-ray रिपोर्ट पूरी तरह फर्जी और AI-जनरेटेड है। लोग अफवाहों पर विश्वास न करें।”

AI फर्जीवाड़े का बढ़ता खतरा

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि AI-आधारित फोटो एडिटिंग और इमेज जनरेशन टूल्स कितनी तेजी से गलत जानकारी फैलाने का हथियार बनते जा रहे हैं।
किसी भी अस्पताल या विभाग को एक तस्वीर के सहारे निशाने पर लाया जा सकता है, और आम लोग इसे सच मान लेते हैं।
विशेषज्ञ हालांकि इनकी फर्जी बनावट एक नजर में पहचान लेते हैं।

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